श्री भक्त भगवन्त चरितामृत सुखविलास

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इस दिव्य ग्रंथ-२ में श्री परमहंस राम मंगल दास जी को दर्शन देकर जिन्होंने दिव्य आध्यात्मिक पद लिखवाये हैं, संक्षिप्त रूप में वे इस प्रकार हैंङ्क - श्री परीक्षित जी, कृपाचार्य जी, मेनका जी, उर्वशी जी, रम्भा जी, विद्याधर गंधर्व जी। - ऋषि भड्‌डरी जी, श्री शबरी जी, गणिका जी, कर्मा माई जी। - संत एकनाथ जी, तुकाराम जी, मीरा जी, नरसी जी, निमाई-निताई जी। - सम्राट अशोक जी, राजा भोज जी, बीरबल जी, शिवाजी, लक्ष्मीबाई जी - परमहंस रामकृष्ण जी की पत्नी शारदा जी, महर्षि अरविन्द जी, गुरु गोविन्द सिंह जी, श्री अद्वैतानन्द जी। - श्री हजरत जी, इब्राहीम जी, औलिया जी, बुल्लेशाह जी। - श्री विद्यासागर जी, कमला नेहरू जी, मौलाना मुहम्मद अली जी। इस ग्रंथ की रचना सन्‌ १९३६ ईत्त् के लगभग से प्रारंभ हुई। इसमें कई संतों ने प्रकट होकर भविष्यवाणी की है कि महात्मा गांधी, जो कबीरदास जी के अंश थे, उनके द्वारा भारत का उद्धार होगा तथा वित्त् संवत्‌ २००० (सन्‌ १९४३ ईत्त्) के बाद भारत के लिए १०० वर्ष का समय अत्यंत सुख का होगा।
More Information
Name श्री भक्त भगवन्त चरितामृत सुखविलास
ISBN sri12345
Pages 100
Language Hindi
Author परमहंस राम मंगल दास
Format Paper Back
About Author :- अनन्त श्री परमहंस राम मंगल दास जी (१८९३-१९८४) गोकुल भवन, अयोध्या परमहंस राम मंगल दास जी विश्व के एक अद्वितीय ब्रह्मलीन संत थे जिनके समक्ष भगवान, देवी-देवता, ऋषि-मुनि, हर धर्म के पैगम्बर, सिद्ध संत, पौराणिक तथा ऐतिहासिक महापुरुषों ने प्रगट होकर आध्यात्मिक पद व उपदेश लिखवाए। परमहंस राम मंगल दास जी ने इन आध्यात्मिक पदों को मुखयतः चार दिव्य गं्रथों में संग्रहीत किया। भगवत्‌ कृपा से लगभग ५० वर्ष पूर्व लिखे गए तथा दिव्य रूप से नामकरण किए गए इन ग्रंथों का सर्व जगत कल्याण के लिए अब प्रकाशन किया जा रहा है। विश्व के इन अलौकिक ग्रंथों में भगवान के नाम की महिमा, सद्‌गुरु महिमा, सुरति शब्द योग, भगवान को पाने के अनेक मार्ग तथा उनमें आने वाली स्थितियां व अनुभव, ध्यान की विधियां, विभिन्न अनहद नाद, पूजन की विधियां, सब कमलों, चक्रों व नाड़ियों का वर्णन है। भगवान, देवी देवताओं के स्वरूप तथा सब लोकों का वर्णन किया गया है। इन समस्त दिव्य ग्रंथों की मुखय बात यह है कि इनमें किसी विशेष गुरु या साध्न पद्धति का अनुकरण करने के लिए नहीं कहा गया है। ये दिव्य ग्रंथ हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, जैन, बौद्ध आदि सभी धर्मों के पालन करने वालों के लिए हैं। अपनी अपनी परंपराओं पर चलते हुए कैसे भगवान की प्राप्ति हो सकती है इसका वर्णन दिव्य सिद्ध संतों ने किया है। हर धर्म, जाति व पेशे (व्यवसाय) के संत पुरुष व संत स्त्रियों ने लिखवाया है कि जीवन में कैसा आचार-विचार होना चाहिए तथा उन्होंने किस प्रकार के कार्य किए जिनसे उनका कल्याण हुआ तथा उन्हें भगवान का धाम प्राप्त हुआ। इन दिव्य ग्रंथों में सब धर्मों का सार, उनकी एकता, विश्व बंधुत्व, सब में प्रेम व्यवहार, सद्‌भाव, दीनता व सेवा भाव का उपदेश दिया गया है। श्री गुरुदेव परमहंस राम मंगल दास जी के अनुसार, इन ग्रंथों को जो पढ ेगा, उन बातों पर चलेगा और तदनुसार अपनी दिनचर्या बनाएगा तो उसका जीवन सार्थक होगा, उनका कल्याण होगा।
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