Pidhiyon Ke Vaaste Ham Aap Zimmedar Hain (पीढ़ियों के वास्ते हम आप ज़िम्मेदार हैं)

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नाम- डॉ. वी.के. शेखर आईपीएस (सेवानिवृत्त)
पिता का नाम- श्री बाबू राम आईआरएस (सेवानिवृत्त)
जन्म तिथि- 27-07-1957
शैक्षिक योग्यता- स्नातकोत्तर- एमएससी- रसायन विज्ञान, रोहिलखंड विश्वविद्यालय, बरेली, यूपी।
एम.ए.- राजनैतिक विज्ञान, रोहिलखंड विश्वविद्यालय, बरेली, यू.पी.
एम.ए.- पत्रकारिता और जनसंचार, राजऋषि पुरुषोत्तम दास टंडन विश्व विद्यालय, इलाहाबाद।
पीएच.डी. -
राजनीति विज्ञान- रोहिलखंड विश्वविद्यालय, बरेली, यूपी, वर्ष-2013.
खेलकूद- हॉकी, पावर-लिफ्टिंग और निशानेबाजी।
हॉबी- मानवीय मूल्यों का संवर्धन, पर्यटन, फोटोग्राफी, पढ़ना और लिखना।
पदक- राष्ट्रपति पुलिस पदक
पुरस्कार- भारत सरकार द्वारा साहित्य लेखन में पं गोविंद बल्लभ पंत पुरस्कार जब शायर अपनी शायरी में जीवन के यथार्थ की ओर मुड़ते हैं तो उनके सम्मुख जनजीवन के अनेक चित्र आ खड़े होते हैं। सामाजिक व राजनैतिक क्षेत्र की विद्रूपताएं, आर्थिक क्षेत्र की विषमताएं, धार्मिक क्षेत्र की नासमझियाँ और साहित्यिक क्षेत्र के अवमूल्यन, इन सब के विरुद्ध इंसानी जज़्बा और संघर्ष उन्हें कहीं न कहीं झकझोरते हैं और यही झकझोर उनकी शायरी में जब लफ़्ज़ बनकर चमक उठती है तो उनकी शायरी निखर उठती है।
मेरी किताब 'पीढ़ियों के वास्ते हम-आप ज़िम्मेदार हैं' आपके हाथों में है, आशा है कि यह आपकी सकारात्मक सोच को कुछ नए आयाम देने में सफल होगी।

More Information
Name Pidhiyon Ke Vaaste Ham Aap Zimmedar Hain (पीढ़ियों के वास्ते हम आप ज़िम्मेदार हैं)
ISBN 9789354865220
Pages 108
Language Hindi
Author V. K. Shekhar
Format Paperback
UB Label New

नाम- डॉ. वी.के. शेखर आईपीएस (सेवानिवृत्त)
पिता का नाम- श्री बाबू राम आईआरएस (सेवानिवृत्त)
जन्म तिथि- 27-07-1957
शैक्षिक योग्यता- स्नातकोत्तर- एमएससी- रसायन विज्ञान, रोहिलखंड विश्वविद्यालय, बरेली, यूपी।
एम.ए.- राजनैतिक विज्ञान, रोहिलखंड विश्वविद्यालय, बरेली, यू.पी.
एम.ए.- पत्रकारिता और जनसंचार, राजऋषि पुरुषोत्तम दास टंडन विश्व विद्यालय, इलाहाबाद।
पीएच.डी. -
राजनीति विज्ञान- रोहिलखंड विश्वविद्यालय, बरेली, यूपी, वर्ष-2013.
खेलकूद- हॉकी, पावर-लिफ्टिंग और निशानेबाजी।
हॉबी- मानवीय मूल्यों का संवर्धन, पर्यटन, फोटोग्राफी, पढ़ना और लिखना।
पदक- राष्ट्रपति पुलिस पदक
पुरस्कार- भारत सरकार द्वारा साहित्य लेखन में पं गोविंद बल्लभ पंत पुरस्कार जब शायर अपनी शायरी में जीवन के यथार्थ की ओर मुड़ते हैं तो उनके सम्मुख जनजीवन के अनेक चित्र आ खड़े होते हैं। सामाजिक व राजनैतिक क्षेत्र की विद्रूपताएं, आर्थिक क्षेत्र की विषमताएं, धार्मिक क्षेत्र की नासमझियाँ और साहित्यिक क्षेत्र के अवमूल्यन, इन सब के विरुद्ध इंसानी जज़्बा और संघर्ष उन्हें कहीं न कहीं झकझोरते हैं और यही झकझोर उनकी शायरी में जब लफ़्ज़ बनकर चमक उठती है तो उनकी शायरी निखर उठती है।
मेरी किताब 'पीढ़ियों के वास्ते हम-आप ज़िम्मेदार हैं' आपके हाथों में है, आशा है कि यह आपकी सकारात्मक सोच को कुछ नए आयाम देने में सफल होगी।

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