ओशो की मधुशाला में बच्‍चन

₹40.00
-
+

Quick Overview

यह पुस्‍तक ‘ओशो की मधुशाला में बच्‍चन’ श्री बच्‍चन जी और स्‍वामी अगेह भारती जी के अंतरंग क्षणों की उपलब्धि है, ऐसे अंतरंग क्षणों की, जैसे दो कबूतर अपने घोंसले में बैठे गुटर-गूं, गूटर-गूं करते बिताते हैं। श्री बच्‍चन (डॉ. हरवंशराय बच्‍चन) एक ऐसी जीवन-दृष्टि के कवि हैं जो अभी समय की सीमा में अभिव्‍यक्ति नहीं हुई थी या कि जो अभी गर्भावस्‍था में ही थी और जिसे अभिव्‍यक्‍त करने के लिए एक ऐसा संवेदनशील हृदय चाहिए जो सत्‍य की दूर बजती नूपुर-ध्‍वनियों को सुन सके। ‘अगेह जी’ एक कविता है, जिंदा कविता, एक ऐसी कविता, जिसमें जीवन के अगम्‍य शिखर झलकते हैं। ओशो की मधुशाला के फक्‍कड़ पियक्‍कड़ है स्‍वामी अगेह भारती। यही पियक्‍कड़ मधुशाला के गायक श्रीयुत् बच्‍चनजी को भी इस मधुशाला में ले आया है। आदरणीय बच्‍चन जी की मधुशाला हजारों हृदयों पर लिखी गई है।

More Information
Name ओशो की मधुशाला में बच्‍चन
ISBN 8128803301
Pages 160
Language Hindi
Author Ageh Bharti
Format Paperback

यह पुस्‍तक ‘ओशो की मधुशाला में बच्‍चन’ श्री बच्‍चन जी और स्‍वामी अगेह भारती जी के अंतरंग क्षणों की उपलब्धि है, ऐसे अंतरंग क्षणों की, जैसे दो कबूतर अपने घोंसले में बैठे गुटर-गूं, गूटर-गूं करते बिताते हैं। श्री बच्‍चन (डॉ. हरवंशराय बच्‍चन) एक ऐसी जीवन-दृष्टि के कवि हैं जो अभी समय की सीमा में अभिव्‍यक्ति नहीं हुई थी या कि जो अभी गर्भावस्‍था में ही थी और जिसे अभिव्‍यक्‍त करने के लिए एक ऐसा संवेदनशील हृदय चाहिए जो सत्‍य की दूर बजती नूपुर-ध्‍वनियों को सुन सके। ‘अगेह जी’ एक कविता है, जिंदा कविता, एक ऐसी कविता, जिसमें जीवन के अगम्‍य शिखर झलकते हैं। ओशो की मधुशाला के फक्‍कड़ पियक्‍कड़ है स्‍वामी अगेह भारती। यही पियक्‍कड़ मधुशाला के गायक श्रीयुत् बच्‍चनजी को भी इस मधुशाला में ले आया है। आदरणीय बच्‍चन जी की मधुशाला हजारों हृदयों पर लिखी गई है।

  • Free Shipping on orders Above INR 350 Valid In India Only
  • Self Publishing Get Your Self Published
  • Online support 24/7 10am to 7pm+91-9716244500