मन से आजाद

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Quick Overview

तुम्‍हारे बेहोश होने पर ही मन तुम्‍हारा मालिक हो जाता है। तब तुम बेहोश रहते हो, तब ही मन अपनी मर्जी चलाता है। फिर उस बेहोसी में तुम ऐसे-ऐसे काम कर जाते हो, जो शायद होश में तुम कभी भी नहीं कर पाओ। जितना ध्‍यान का रस गहरा होता जाएगा, उतना-उतना तुम्‍हारा मन और मन के विकार तुम्‍हारे देखते-देखते ही कम होने लग जाएंगे, उन्‍हें अलग से हटाना नहीं पड़ेगा।

More Information
Name मन से आजाद
ISBN 8128815083
Pages 36
Language Hindi
Author Anandmurti Guru Maa
Format Paper Back

तुम्‍हारे बेहोश होने पर ही मन तुम्‍हारा मालिक हो जाता है। तब तुम बेहोश रहते हो, तब ही मन अपनी मर्जी चलाता है। फिर उस बेहोसी में तुम ऐसे-ऐसे काम कर जाते हो, जो शायद होश में तुम कभी भी नहीं कर पाओ। जितना ध्‍यान का रस गहरा होता जाएगा, उतना-उतना तुम्‍हारा मन और मन के विकार तुम्‍हारे देखते-देखते ही कम होने लग जाएंगे, उन्‍हें अलग से हटाना नहीं पड़ेगा।

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