मां

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जिस प्रकार ब्रह्माण्‍ड के गहर अंधकार के गर्भ से सृष्टि का सृजन नव-ग्रहों के रूप में हुआ है ठीक वैसे ही मनुष्‍य के जीवन का सृजन भी मां के गर्भ में नौ महीनों के अंतराल में होता है। और ये नौ महीने नवरात्रि के समान होते हैं जिसमें आत्‍मा शरीर धारण करती है। लेखक मां ऐसा चेहरा आपके सामने लाना चाहता था, जिसमें मां का प्रतिबिम्‍ब भी साफ नजर आए। इस प्रयास में लेखक कहां तक सफल हुआ? यह आपको बताना है।

More Information
Name मां
ISBN 9790000000000
Pages 144
Language Hindi
Author Tarun Engineer
Format Paperback

जिस प्रकार ब्रह्माण्‍ड के गहर अंधकार के गर्भ से सृष्टि का सृजन नव-ग्रहों के रूप में हुआ है ठीक वैसे ही मनुष्‍य के जीवन का सृजन भी मां के गर्भ में नौ महीनों के अंतराल में होता है। और ये नौ महीने नवरात्रि के समान होते हैं जिसमें आत्‍मा शरीर धारण करती है। लेखक मां ऐसा चेहरा आपके सामने लाना चाहता था, जिसमें मां का प्रतिबिम्‍ब भी साफ नजर आए। इस प्रयास में लेखक कहां तक सफल हुआ? यह आपको बताना है।

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