काका की फुलझड़ियां

Availability: In stock
₹110.00
-
+

Quick Overview

काकाजी ने हास्‍य को अपने जीवन का मूलमंत्र बनाया और आजीवन इसी के प्रचार-प्रसार में जुटे रहे। अपने जीवनकाल में उन्‍होंने कितने उदास चेहरों को मुस्‍काने बांटीं, यह ठीक-ठीक बता पाना मुश्किल है। उनकी रचनाएं समचमुच फुलझड़ियों के समान हैं, जो पढ़ने वालों के मन को हास्‍य के उजाले से भर जातीं हैं। इस पुस्‍तक में संग्रहित काका जी की हास्‍य-कविताएं, कविसम्‍मेलनों और काव्‍य-गोष्ठियों में हजारों-लाखों श्रोताओं को गुदगुदा चुकी हैं। सन् 1965 में पहली बार प्रकाशित इस संकलन की 3 लाख से अधिक प्रतियां अब तक बिक चुकी हैं डॉ. गिरिराजशरण अग्रवाल
More Information
Name काका की फुलझड़ियां
ISBN 8171824137
Pages 136
Language Hindi
Author Kaka Hathrasi
Format Paperback
काकाजी ने हास्‍य को अपने जीवन का मूलमंत्र बनाया और आजीवन इसी के प्रचार-प्रसार में जुटे रहे। अपने जीवनकाल में उन्‍होंने कितने उदास चेहरों को मुस्‍काने बांटीं, यह ठीक-ठीक बता पाना मुश्किल है। उनकी रचनाएं समचमुच फुलझड़ियों के समान हैं, जो पढ़ने वालों के मन को हास्‍य के उजाले से भर जातीं हैं। इस पुस्‍तक में संग्रहित काका जी की हास्‍य-कविताएं, कविसम्‍मेलनों और काव्‍य-गोष्ठियों में हजारों-लाखों श्रोताओं को गुदगुदा चुकी हैं। सन् 1965 में पहली बार प्रकाशित इस संकलन की 3 लाख से अधिक प्रतियां अब तक बिक चुकी हैं डॉ. गिरिराजशरण अग्रवाल
  • Free Shipping on orders Above INR 600 Valid In India Only
  • Self Publishing Get Your Self Published
  • Online support 24/7 10am to 7pm+91-9716244500
OTHER WEBSITES