ध्‍यान दर्शन

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ओशो स्‍वयं तूफानों के पाले हुए थे। और उनका अक्षर-अक्षर मुहब्‍बत का दीया कर उन तूफानों में जलता रहा--- जलता रहेगा। यह अक्षर उन्‍हीं के नाम जिस ओशों से मैंने बहुत कुछ पाया है।, अर्पित करती हूं- ‘कह दो मुखलिफ हवाओं से कह दो

मुहब्‍बत का दीया तो जलता रहेगा।

More Information
Name ध्‍यान दर्शन
ISBN 8128802771
Pages 176
Language Hindi
Author Osho
Format Paperback

ओशो स्‍वयं तूफानों के पाले हुए थे। और उनका अक्षर-अक्षर मुहब्‍बत का दीया कर उन तूफानों में जलता रहा--- जलता रहेगा। यह अक्षर उन्‍हीं के नाम जिस ओशों से मैंने बहुत कुछ पाया है।, अर्पित करती हूं- ‘कह दो मुखलिफ हवाओं से कह दो मुहब्‍बत का दीया तो जलता रहेगा।

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