अंतरतम की खोज

₹50.00
-
+

Quick Overview

हर समय सोच-सोच, चिंता, चिंता, चिंता। यही सोच और चिंता तुम्‍हारे शरीर को खा जाती है। आदमी को दिल की बीमारी से बचाना है, तो उसको दवा की तरह ध्‍यान करने को कहा जाना चाहिए। डॉक्‍टर लोग रोगियों को समझाते हैं समय पर दवाई खाने के लिए, ठीक ऐसे ही अपने रोगियों को अगर वे पूरा-पूरा ठीक हुआ देखना चाहते हैं, तो उन्‍हें ‘ध्‍यान’ करना भी सिखाना चाहिए।

More Information
Name अंतरतम की खोज
ISBN 8128815156
Pages 40
Language Hindi
Author Anandmurti Guru Maa
Format Paperback

हर समय सोच-सोच, चिंता, चिंता, चिंता। यही सोच और चिंता तुम्‍हारे शरीर को खा जाती है। आदमी को दिल की बीमारी से बचाना है, तो उसको दवा की तरह ध्‍यान करने को कहा जाना चाहिए। डॉक्‍टर लोग रोगियों को समझाते हैं समय पर दवाई खाने के लिए, ठीक ऐसे ही अपने रोगियों को अगर वे पूरा-पूरा ठीक हुआ देखना चाहते हैं, तो उन्‍हें ‘ध्‍यान’ करना भी सिखाना चाहिए।

  • Free Shipping on orders Above INR 600 Valid In India Only
  • Self Publishing Get Your Self Published
  • Online support 24/7 10am to 7pm+91-9716244500